सवालों के कटघरे में गुरुकुल पब्लिक स्कूल प्रबंधन प्रेस वार्ता मैं उठ गंभीर प्रश्न जवाबों से अधिक अनुत्तरित रह गए सवाल

सवालों के कटघरे में गुरुकुल पब्लिक स्कूल प्रबंधन, प्रेसवार्ता में उठे गंभीर प्रश्न; जवाबों से अधिक अनुत्तरित रह गए सवाल
कवर्धा। गुरुकुल पब्लिक स्कूल कवर्धा एक बार फिर गंभीर आरोपों और विवादों के घेरे में दिखाई दे रहा है। लगभग दो वर्ष पुराने एक संवेदनशील प्रकरण को लेकर विद्यालय प्रबंधन द्वारा 18 अगस्त को सुबह 9:30 बजे प्रेसवार्ता आयोजित कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया। किंतु पत्रकारों के तीखे एवं क्रमिक सवालों के बीच प्रेसवार्ता का स्वरूप ही सवाल-जवाब के कठघरे में तब्दील होता नजर आया।
प्रेसवार्ता के दौरान विद्यालय की प्राचार्या एवं प्रबंधन के सलाहकार अधिवक्ता द्वारा समयाभाव का हवाला देते हुए वहां से चले जाने की बात सामने आई, जबकि संस्था प्रबंधक की गैरमौजूदगी भी पत्रकारों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। परिणामस्वरूप जिस प्रेसवार्ता का उद्देश्य आरोपों पर प्रबंधन का पक्ष स्पष्ट करना था, वहीं कई महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर अधूरे अथवा अनुत्तरित रह गए।
संवेदनशील छात्रा प्रकरण ने फिर खींचा ध्यान
मामला लगभग दो वर्ष पूर्व का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार बीजापुर जिले के आवापल्ली क्षेत्र की आदिवासी समाज से संबंधित एक नाबालिग छात्रा गुरुकुल पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत थी तथा विद्यालय के छात्रावास में निवास करती थी। इसी दौरान उसके गर्भवती होने का मामला सामने आने के बाद विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली और छात्रावास व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए थे।
बताया जाता है कि संबंधित छात्रा का चयन भारत सरकार द्वारा संचालित प्रयास योजना के माध्यम से हुआ था। घटना सामने आने के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस प्रकरण को लेकर विद्यालय प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए थे। सोशल मीडिया पर भी मामला व्यापक रूप से चर्चित हुआ, जिसके चलते विद्यालय की प्रतिष्ठा और प्रबंधन की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हुई।
हालांकि नाबालिग छात्रा से संबंधित मामले में वास्तविक घटनाक्रम, दोष अथवा जिम्मेदारी का निर्धारण केवल अधिकृत जांच, न्यायिक प्रक्रिया और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
पूर्व विवादों ने बढ़ाई प्रबंधन की जवाबदेही
गुरुकुल पब्लिक स्कूल को लेकर पूर्व में भी विवाद सामने आने के दावे किए जाते रहे हैं। आरोप है कि अनुसूचित जाति वर्ग की एक नाबालिग छात्रा से कथित छेड़छाड़ के मामले में विद्यालय से जुड़े कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई हुई थी तथा कुछ कर्मचारियों के जेल जाने की बात भी सामने आई थी।
यदि इन मामलों में आधिकारिक स्तर पर कार्रवाई हुई है, तो विद्यालय प्रबंधन की संस्थागत जवाबदेही, छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रशासनिक निगरानी की भूमिका पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है।
सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का दबाव
इन कथित घटनाक्रमों को लेकर कवर्धा के विभिन्न राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा समय-समय पर विरोध और आंदोलन किए जाने की बात सामने आई है। संगठनों ने जिला प्रशासन से विद्यालय से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, व्यापक एवं तथ्यपरक जांच कराए जाने की मांग की है।
संगठनों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही अथवा नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने की स्थिति में आंदोलन को व्यापक रूप दिया जा सकता है।
सफाई देने बुलाई प्रेसवार्ता, लेकिन सवाल रह गए बरकरार
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि जब विद्यालय प्रबंधन ने स्वयं प्रेसवार्ता आयोजित कर अपने ऊपर लगे आरोपों का स्पष्टीकरण देने का निर्णय लिया, तो पत्रकारों द्वारा पूछे गए महत्वपूर्ण सवालों के बीच प्रबंधन के प्रमुख प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति अथवा प्रेसवार्ता से प्रस्थान की स्थिति क्यों बनी?
प्रेसवार्ता के दौरान उठे सवालों ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल आरोपों का खंडन अथवा सामान्य सफाई पर्याप्त नहीं होगी। प्रबंधन को घटनाक्रम से संबंधित दस्तावेजी तथ्यों, प्रशासनिक कार्रवाई, जांच की स्थिति, छात्रावास की निगरानी व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही पर स्पष्ट एवं प्रमाणिक जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
अब प्रशासन की भूमिका पर निगाहें
लगातार विवादों और आरोपों के बीच अब सबसे अधिक जिम्मेदारी जिला प्रशासन की बनती है। यदि विद्यालय के संबंध में विभिन्न स्तरों पर शिकायतें प्राप्त हुई हैं, तो उन्हें एकीकृत करते हुए निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करना प्रशासन के लिए आवश्यक हो जाता है।
मामला नाबालिग छात्रा, छात्रावास व्यवस्था और विद्यालयी सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील विषयों से जुड़ा होने के कारण इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय तथ्य, दस्तावेज और विधिसम्मत जांच के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचाना जरूरी है।
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फिलहाल प्रेसवार्ता के बाद विवाद समाप्त होने के बजाय कई नए प्रश्नों के साथ और गहरा होता दिखाई दे रहा है। विद्यालय प्रबंधन की सफाई एक पक्ष है, जबकि सामने उठ रहे गंभीर सवालों का निर्णायक उत्तर अब प्रशासनिक जांच एवं आधिकारिक अभिलेखों से ही सामने आ सकेगा।
कवर्धा में अब सवाल केवल आरोपों का नहीं, बल्कि जवाबदेही, संस्थागत पारदर्शिता और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा का है।



